Success story: अक्सर लोग संसाधनों की कमी का रोना रोते हैं, लेकिन सहरसा के रमन झा ने साबित कर दिया कि अगर इरादे फौलादी हों, तो अभाव भी अवसर में बदल जाते हैं. 1994 में दिल्ली की सड़कों पर पैदल चलकर ₹500 की ट्यूशन पढ़ाने वाले रमन झा आज जिले के सबसे सफल उद्यमियों और 'टॉप रिच पर्सन' में शुमार हैं. ग्रेजुएशन के बाद आर्थिक तंगी ऐसी थी कि रमन के पास साइकिल तक खरीदने की हैसियत नहीं थी. लेकिन दिल्ली में एक गुरु के मार्गदर्शन ने उनके जीवन की दिशा बदल दी. उन्होंने तय किया कि वे शिक्षा और स्वास्थ्य को ही अपना मिशन बनाएंगे. सहरसा लौटकर उन्होंने एक छोटे कोचिंग से शुरुआत की, जो आज कई प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों और दो अत्याधुनिक अस्पतालों के विशाल साम्राज्य में तब्दील हो चुका है. रमन झा की कहानी सिखाती है कि सफलता केवल बैंक बैलेंस से नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव से मापी जाती है. आज उनके संस्थानों में सैकड़ों लोग कार्यरत हैं और हजारों बच्चे भविष्य संवार रहे हैं. शून्य से शिखर तक का उनका यह सफर बिहार के हर उस युवा के लिए मिसाल है जो बड़े सपने देखने की हिम्मत रखता है.
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