Inspirational story: कहते हैं हौसले बुलंद हों तो शारीरिक अक्षमता भी बेड़ियां नहीं बन पातीं. पूर्वी चंपारण की जूही झा ने इसे सच कर दिखाया है. जन्म के एक साल बाद ही पैरालाइज्ड होने के बावजूद, जूही ने भाई की साइकिल और फिर व्हीलचेयर के सहारे स्नातक तक की पढ़ाई पूरी की. आज वह न केवल आत्मनिर्भर हैं, बल्कि सैकड़ों अनपढ़ महिलाओं और गरीब बच्चों को शिक्षित कर समाज की मुख्यधारा से जोड़ रही हैं. तत्कालीन डीएम द्वारा सम्मानित जूही की यह कहानी संघर्ष, स्वावलंबन और नारी शक्ति की एक अनोखी मिसाल है.
from सक्सेस स्टोरी News in Hindi, सक्सेस स्टोरी Latest News, सक्सेस स्टोरी News https://ift.tt/h7beEjd https://ift.tt/gTLsjVa Inspirational story: कहते हैं हौसले बुलंद हों तो शारीरिक अक्षमता भी बेड़ियां नहीं बन पातीं. पूर्वी चंपारण की जूही झा ने इसे सच कर दिखाया है. जन्म के एक साल बाद ही पैरालाइज्ड होने के बावजूद, जूही ने भाई की साइकिल और फिर व्हीलचेयर के सहारे स्नातक तक की पढ़ाई पूरी की. आज वह न केवल आत्मनिर्भर हैं, बल्कि सैकड़ों अनपढ़ महिलाओं और गरीब बच्चों को शिक्षित कर समाज की मुख्यधारा से जोड़ रही हैं. तत्कालीन डीएम द्वारा सम्मानित जूही की यह कहानी संघर्ष, स्वावलंबन और नारी शक्ति की एक अनोखी मिसाल है.
0 टिप्पणियाँ