Success Story: जहां पानी की एक-एक बूंद के लिए संघर्ष हो और जमीन पत्थर जैसी बंजर, वहां खेती किसी सपने जैसी लगती है. लेकिन बिहार के जहानाबाद के शिवनगर गांव की महिलाओं ने इस असंभव को संभव कर दिखाया है. वाणावर पहाड़ की तलहटी में बसे इस गांव की आजीविका अब सहजन (मोरिंगा) के भरोसे फल-फूल रही है. ग्रामीणों ने बंजर जमीन का तोड़ निकालते हुए हर घर में सहजन के पौधे लगाए हैं. आज गांव में 500 से अधिक पेड़ हैं. जिनसे रोजाना 2 क्विंटल तक उत्पादन होता है. स्थानीय निवासी सोनी देवी बताती हैं कि पानी की किल्लत के बावजूद सहजन की खेती में कोई खर्च नहीं आता, जबकि फल और पत्तियों को बेचकर हर परिवार सालाना 10 हजार रुपये तक की शुद्ध बचत कर रहा है. खास बात यह है कि गांव के पास ही मोरिंगा पत्तियों से दवा बनाने वाली यूनिट है. जहां ₹20 प्रति किलो की दर से पत्तियां खरीदी जाती हैं. पढ़ाई के साथ युवा भी इस काम में हाथ बंटा रहे हैं, जिससे यह बंजर इलाका अब आर्थिक मजबूती का केंद्र बन गया है.
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